नई दिल्ली. ज्यादातर संस्थानों का मानना है कि कोविड-19 का असर 6 महीने बाद तक महसूस किया जाएगा। 72% संस्थानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि लगातार रिमोट वर्किंग से उत्पादकता घटेगी। कंसल्टेंसी एंड एजवाइजरी सर्विसेज प्रोवाइडर ईएंडवाय के सर्वे में यह बात सामने आई है।
अलग-अलग सेक्टर के 100 संस्थानों पर सर्वे
सर्वे के मुताबिक मौजूदा स्वास्थ्य संकट संस्थानों को एचआर प्रोसेस और संचालन के तौर तरीकों पर फिर से विचार करने को मजबूर कर रहा है। कोविड-19 के देश पर असर और स्थिति को संभालने के लिए तैयारियों पर ईएंडवाय ने अलग-अलग सेक्टर के 100 संस्थानों के एचआर हेड पर यह सर्वे किया है।
कोविड संकट से निपटने के लिए तैयार संस्थानों की संख्या 50% से भी कम
सर्वे में सामने आया है कि 70% से ज्यादा संस्थान भर्ती के वर्चुअल तरीकों की ओर बढ़ रहे हैं। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकें अहम भूमिका निभा रही हैं। कोविड संकट से निपटने के लिए तैयार संस्थानों की संख्या 50% से भी कम हैं। संकट बढ़ने की स्थिति में यह आंकड़ा 35% से भी कम होगा। आपात स्थिति को ध्यान में रखकर आगे की योजना बनाने वाले संस्थानों की संख्या 10% से भी कम है।
संस्थानों को आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाना होगा
सर्वे में शामिल करीब 87% लोग ऐसे हैं जो लॉकडाउन जैसे हालातों की वजह से यात्रा नहीं कर सकते। ऐसे में संस्थानों को कामकाज के तौर-तरीके बदलने होंगे। उन्हें आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश करना होगा। सर्वे के मुताबिक सिर्फ 22% संस्थान ऐसे हैं जो शॉर्ट टर्म में मैनपावर का इस्तेमाल बढ़ाने के बारे में सोच रहे हैं। 35% भविष्य में इस्तेमाल बढ़ाने की सोच रखते हैं।