नई दिल्ली. फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) ने शुक्रवार को कहा कि कोरोनावायरस महामारी के कारण भारत के निर्यात क्षेत्र के 50 फीसदी से ज्यादा ऑर्डर निरस्त हो चुके हैं। इस कारण निर्यात क्षेत्र से जुड़े डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों की नौकरी पर संकट पैदा हो गया है। इसका अलावा अभी भविष्य में भी निर्यात के ऑर्डर मिलने की संभावना कम दिख रही है। मौजूदा हालातों को देखते हुए फियो ने निर्यातकों के लिए तुरंत राहत पैकेज घोषित करने की मांग की है। फियो के अध्यक्ष शरद कुमार सराफ ने कहा है कि इस समय जीवन और आजीविका के बीच संतुलन की आवश्यकता है, क्योंकि केवल एक का चयन करना देश के लिए विनाशकारी हो सकता है।
निर्यातकों के पास बचे काफी कम ऑर्डर
सराफ ने कहा कि अब निर्यातकों के पास काफी कम ऑर्डर बचे हैं। ऐसे में यदि फैक्ट्रियों को न्यूनतम वर्कफोर्स के साथ चलाने की अनुमति नहीं मिलती है तो कई निर्यातकों को अपूर्णीय क्षति होगी। इसका नतीजा यह होगा कि वे फैक्ट्रियां बंद करने पर मजबूर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि निर्यातक इस बात से भी दुखी है कि फैक्ट्री बंद होने के बाद होने वाला नुकसान हर हाल में उन्हें ही वहन करना होगा। सराफ ने कहा कि नौकरियों पर संकट के अलावा एनपीए बढ़ने की समस्या भी पैदा होगा। इसका कारण यह है कि अधिकांश एक्सपोर्ट यूनिट्स की आर्थिक हालात काफी खराब हैं।
लॉकडाउन से प्रभावित हुईं यह इंडस्ट्री
शरद कुमार सराफ ने बताया कि लॉकडाउन के कारण अपैरल, जेम्स एंड ज्वैलरी, चमडा, हैंडीक्राफ्ट, इंजीनियरिंग और टैक्सटाइल इंडस्ट्री बुरी तरह से प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस महामारी से उबरने के बाद चीन फिर से अपनी फैक्ट्रियां शुरू कर दी हैं। इससे सारे ऑर्डर चीन के पास जा रहे हैं। इससे हम लगातार अपना बाजार खो रहे हैं। यदि हम अभी अपनी फैक्ट्रियां शुरू नहीं करते हैं तो काफी देर हो जाएगी। सराफ के मुताबिक, चीन और श्रीलंका जैसी छोटी अर्थव्यवस्था वाले देशों ने भी निर्यातकों के लिए राहत पैकेज घोषित कर दिए हैं।