नई दिल्ली. आरबीआई के बोर्ड मेंबर सतीश मराठे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सुझाव दिया है कि इंडस्ट्री की मदद के लिए सभी बैकों को लोन रीशेड्यूल करने के लिए कहा जाना चाहिए। कोविड-19 के असर को देखते हुए छोटे एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को विशेष रूप से मदद की जरूरत है।
लोन एनपीए हुए तो रिवाइव होना मुश्किल होगा: मराठे
मराठे ने कहा है कि यह असाधारण वक्त है, ऐसे में असाधारण कदम उठाए जाने चाहिए। उनका कहना है कि सिर्फ नकदी बढ़ाकर, ब्याज दरों में कमी कर, स्पेशल पर्पस व्हीकल के जरिए गारंटी मुहैया करवाकर या नियमों में छूट देकर इकोनॉमी को रिवाइव नहीं किया जा सकता। इकोनॉमी को बढ़ाने के लिए बैंकिंग सेक्टर का सक्रिय योगदान होना चाहिए। लॉकडाउन या स्लोडाउन की वजह से लोन खाते एनपीए होते हैं तो इनका फिर से रिवाइव होना मुश्किल होगा। क्योंकि, बैंक अधिकारियों के मन में सीवीसी, कैग या सीबीआई जांच का डर भी रहता है।
'एसेट क्लासिफिकेशन, सिबिल इन्फॉर्मेशन के नियम आसान हों'
मराठे ने कहा है कि लोन खाते एनपीए होने से बैंकों की वित्तीय स्थिति भी बिगड़ती है। ऐसे में सरकार को अतिरिक्त नकदी मुहैया करवानी पड़ती है। उन्होंने कहा है कि इनकम और एसेट क्लासिफिकेशन, प्रोविजनिंग, लोन खातों की डाउनग्रेडिंग और क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियों को रिपोर्टिंग के नियमों में राहत देनी चाहिए। सभी बैंकों को इस बात की इजाजत मिलनी चाहिए कि वे बिना डाउनग्रेड किए सभी लोन खातों को रीशेड्यूल कर सकें।
'लॉकडाउन, स्लोडाउन से सप्लाई चेन बाधित हुई'
इकोनॉमी के मौजूदा हाल पर मराठे का कहना है कि लॉकडाउन और स्लोडाउन ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को अस्त-व्यस्त कर दिया है। हर तरह के कारोबार प्रभावित हुए हैं। सप्लाई चेन बाधित हो गई है। गैर-संगठित सेक्टर में लाखों यूनिट में काम पूरी तरह रुक गया है।